डिप्रेशन के कारण शरीर में होने वाली बीमारियाँ |

डिप्रेशन भले ही एक मनोवैज्ञानिक समस्या है पर इसका मानव शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसे केवल उदासी और मन से जुड़ी मामूली समस्या समझकर नज़रअंदाज़ न करें, बल्कि अच्छे मनोवैज्ञानिक से सम्पर्क करके उपचार कराए |

Depression

डिप्रेशन का शरीर में प्रभाव व लक्षण :-

१. जीवन की परेशानियों और चुनौतियों ने कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं का जन्म हुआ है, डिप्रेशन भी उनमें से एक है। इसके बारे में ऐसी धारणा बनी  हुई है कि यह केवल मन से जुडी समस्या है पर बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर भी इसका बुरा प्रभाव पडता है इनमे से  हमारे शारीर की गतिविधियों को संचालित करने के साथ भावनाओ को नियन्त्रण करने वाला ब्रेन भी उदासी या डिप्रेशन की स्थिति में अपनी क्रियाओ को सही ढंग से नही कर पाता है। अगर व्यक्ति बिना सही वजह के दो सप्ताह से ज्य़ादा समय  तक गहरी उदासी में डूबा रहे, जिससे उसके रोज के क्रियाकलाप प्रभावित होने लगे , तब इस स्थिति को  डिप्रेशन कहा जाता है।

२. डिप्रेशन हमारे शरीर के इन हिस्सों को प्रभावित करके कमजोर कर सकती है |

  • कमजोर इम्यून सिस्टम होने पर डिप्रेशन की स्थिति में तनाव बढाने वाले हॉर्मोन बढ़ने लगता है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने लगती है। जिसकी वजह से सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार  जैसी समस्या अक्सर होने लगती है |
  • दिल पर डिप्रेशन का एक प्रमुख कारण तनाव या चिंता होने पर व्यक्ति के शरीर में सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होने लगता है, जिसके कारण शरीर में नॉरपिनेफ्राइन  हॉर्मोन का गति बढ जाता है, जिसके वजह से ब्लड प्रेशर बढ जाता है। ऐसे में दिल तेजी से धडकने लगता है, हृदय की रक्वाहिका नलियां सिकुड जाती हैं, खून का प्रवाह तेज हो जाता है, जिससे दिल पर दबाव बढता है, व्यक्ति को पसीना और चक्कर आने लगता है। लंबे समय तक डिप्रेशन में रहने वाले लोगों में हार्ट अटैक की भी आशंका बढ जाती है
  •  पाचन तंत्र डिप्रेशन का प्रभाव होने पर सुचारू ढंग से काम नहीं करता। इसकी वजह डिप्रेशन के दौरान सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम की सक्रिया बढ़ जाती है जिसके कारण आंतों में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का सिक्रीशन बढ जाता है, जिससे पेट में दर्द और सूजन, सीने में जलन, कब्ज या लूज मोशन जैसी समस्याएं होने लगती है |