नर्क चतुर्दशी या छोटी दिपावली (रूप चौदस) के रूप मनाने के पीछे की कहानी

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नर्क चतुर्दशी या छोटी दिवाली 29 october 2016 

नर्क चतुर्दशी कार्तिक मास के चौदस (दीपावली के एकदिन पहले) को मनाया जाता है, नर्क चतुर्दशी नरकासुर नाम के राक्षस का वध कृष्णजी ने किया था | क्योकि नरकासुर ने 16000 कन्याओ को बंदी बनाकर रखा था, उन्हें कृष्ण जी ने मुक्त कराया, और तब उन कन्याओ ने कृष्ण जी से कहा की समाज वाले उन्हें स्वीकार नही करेगे | इसका कोई निदान करे, तब कृष्णजी उन 16000 कन्याओ से विवाह  किया, और तब से ऐसी प्रथा है कि इस दिन सुबह शरीर मे तेल लगाकर चिचड़ी की पत्तियों को पानी में डालकर नहाने से नरक से मुक्ति मिलती है,  और शाम के वक्त दीपदान करने से स्वर्गप्राप्ति का योग होता है | पर पुराणों के अनुसार ऐसा माना जाता उन कन्याओ को सम्मान के लिए दीये की बारात सजायी जाती है | तब से बहुत से लोग इसे छोटी दीपावली के रूप मे मानाते है | नर्क चतुर्दशी कार्तिक मास के तेरस से शुरू पांच पर्वो मे से एक है | ये पांच पर्व धनतेरस, नर्क चतुर्दशी, दीपावली, गोवेर्धन पूजा और भाई दूज है |